कुदरत तेरे रुप अनेक २०

1, October 27, 2009 by premlatapandey

क्यों मेरी निर्मलता समाप्त करने को तुले हो? गंदगी अपनी अपने साथ लेकर जाओ।

कुदरत तेरे रुप अनेक १९

1, October 26, 2009 by premlatapandey


मनमोहक!
हरियाली सघना।
सुंदर छटा॥

कुदरत तेरे रुप अनेक १८

1, October 25, 2009 by premlatapandey

पानी है,
जीवन है,
शांति है,
आकर्षण है!

कुदरत तेरे रुप अनेक १७

1, October 22, 2009 by premlatapandey

बादलों की गोद मानों दुलार रही हो प्रकृति!बादलों की गोद

कुदरत तेरे रुप अनेक १६

1, October 21, 2009 by premlatapandey


कोहरा है या कोई सपना!

कुदरत तेरे रुप अनेक १५

1, October 20, 2009 by premlatapandey

आकर्षण!!!

पलक झपकने का मन नहीं करता, बस देखते रहो इन दृश्यों को! क्या खींचता है इनको देखने के लिए!

कुदरत तेरे रुप अनेक १४

1, October 19, 2009 by premlatapandey

ये हरियाली !
कौन सा पहर है सुबह शाम या दोपहर!

कुदरत तेरे रुप अनेक १३

1, October 18, 2009 by premlatapandey

पहाड़ ऊँचे या बिजली के तार!