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एक दिन गुंजी में…

मई 3, 2011

गुंजी में मेडिकल जाँच
12/6/2010 नवाँ दिन
सुबह छः बजे चाय वाले ने दरवाजा खटखटाया तो आँख खुलीं। सभी ने चाय पीना शुरु कर दिया,(मैं बिना दाँत साफ़ किए कुछ नहीं लेती) मैं ब्रश करने बाहर चली गयी। कई लोग दैनिकचर्या में व्यस्त थे। सामने चूल्हे पर पानी गर्म हो रहा था मैंने भी मग में पानी लेकर हाथ-मुँह धो लिए और रसोई में अपने लिए चाय लेने चली गयी।
रसोई में नाश्ता तैयार कर रहे कु.मं.वि.नि. के कर्मचारी ने गर्म चाय का गिलास पकड़ा दिया, मैं चाय लेकर अपने कमरे में लौट आयी। मेरे कमरे के सभी यात्री चाय पीकर अपना लगेज खोलकर धोने वाले कपड़े निकाल रहे थे। मैं तो यह काम कल ही कर चुकी थी सो नहाने चली गयी।
नहानेवालों की बड़ी लाइन लगी हुयी थी। तापमान बहुत कम होने के कारण खुले में पानी बड़ी देर में गर्म हो रहा था, दूसरे कई बाथरुम्स में यात्री कपड़े धो रहे थे।
मैं वहीं चूल्हे के पास बैठकर आग संवारते हुए खाली बाल्टी का इंतजार करने लगी। इतने में मेरा पोर्टर दिखायी दे गया मैंने उसे बुलाया और एक बाल्टी लाने को कहा। वह तुरंत किसी बाथरुम में से दो बाल्टी ले आया और साफ़ करके मुझे दे दी। गर्म पानी लेकर मैं नहाने चली गयी।
आज नहाकर तृप्ति हुई। रोजाना मुंह अंधेरे जमाने वाली ठंड में जल्दी-जल्दी नहाना तो बस नाम मात्र ही था।
धीरे-धीरे सभी लोग तैयार हो गए। भोजन कक्ष में नाश्ता लग गया था। आज नाश्ते में उपमा मिला था। इतने दिन बाद बिना तला नाश्ता देखकर सभी खुश थे और जी भरकर खाया।
लगभग साढ़े आठ बजे एलओ ने सीटी बजायी सब अपनी-अपनी मेडिकल-फ़ाइल के साथ आकर खड़े हो गए। ’ऊँ नमः शिवाय’ के साथ सभी मंदिर में शीश झुकाते हुए भा.ति.सी.पु.ब. के कैंप के प्रांगण में पहुँच गए जहाँ पहले से ही पूरा प्रबंध था।
बिलकुल सामने एक मेज और कुर्सी लगी थी एक साइड में एक नक्शा लटका हुआ था, दूसरी साइड में एलओ के लिए कुर्सी, मुखातिब होकर सभी तीर्थयात्रियों के लिए कुर्सियाँ बिछायीं गयी थीं। सभी यात्री जाकर बैठ गए।
जवानों ने सभी को पानी और चाय-बिस्कुट सर्व कि। इतने में ही डिप्टी.कमांडर.इन ची. मि.चौधरी और दो डॉ. आगए। ऊँ नमःशिवाय के साथ सभी का हाल पूछा। चौधरी साहब ने यात्रा की ब्रीफ़िंग की। उन्होंने सभी को अपनी हैल्थ के प्रति सजग होने के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति भी सजग रहने का आवाह्न भी किया। पर्यावरण की देखभाल के अंतर्गत उनकी बटालियन ने वहाँ एक ’मानसरोवर-वन’ की स्थापना की है जहाँ कैलाश-मानसरोवर जाने वाले सभी यात्रियों से एक-एक देवदार का पौधा रोपवाया जाता है।
उनके संबोधन के बाद डॉक्टर्स ने स्वास्थ्य संबंधी टिप्स दिए | गुंजी हाई-एल्टीट्यूड में आता है। यहाँ पर हवा का दबाव शरीर को प्रभावित करता है। इसलिए यहाँ दो रात ठहराकर शरीर को आगे जाने के लिए तैयार करने के साथ मेडिकल जाँच भी होती है। मेडिकल में फेल होने पर यहाँ से भी वापिस भेजा जा सकता है।
इसके बाद सभी यात्रियों को दो ग्रुप्स में बाँट दिया और एक को मेडिकल जाँच हेतु पास में ही अस्पताल में ले गए और दूसरे को मानसरोवर वन में पौधा रोपने के लिए।
हम पहले ग्रुप में थे सो जाँच के लिए चले गए। मेरा नंबर चौदहवां था। अपने नंबर पर मैं अंदर गयी तो डॉ. ने मेरी रिपोर्ट्स देखीं, ब्लड-प्रैशर हार्ट-बीट इत्यादि चैक की। दिल्ली की रिपोर्ट के मुताबिक मेरा कोलेस्ट्रोल थोड़ा बढ़ा हुआ था, पर ब्लडप्रैशर बिलकुल नॉर्मल था सो फ़िट दे दिया। वीनामैसूर आदि कुछ यात्रियों का ब्लड-प्रैशर हाई था सो उन्हें दवाई देकर शाम को दुबारा जाँच के लिए बुलाया गया था।
इसके बाद मैं, नलिनाबेन, श्रीमति और उनके पति इत्यादि यात्री पौधा रोपने गए। (more…)

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